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| सस्य विज्ञान क्षेत्रीय समन्यवयन इकाई, क्षेत्र-४ | ||||||||||
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समन्वित कीट प्रबन्धन में सस्य क्रियायें सस्य क्रियाओं के साथ समन्वित कीट नियंत्रण एक उत्तम तकनीकी है | समन्वित कीट प्रबन्धन में कीटनाशी रसायनों का प्रयोग ऐसी दशाओं में किया जाता है जब इसकी आवश्यता हो और कीटों की संख्या आर्थिक रूप से हानि पहुँचाने की हो चुकी हो | समन्वित कीट प्रबन्धन में बिना अतिरिक्त लागत वाले तरीके जैसे- (अ) कीट अवरोधी अ थवा सह्य प्रजातियों का प्रयोग, (ब) पानी के निकास का समुचित प्रबन्ध, (स) साफ सुथरी खेती एवं वैकल्पिक परपोषी पौधों का निकालना, (द) नत्रजन उर्वरकों का उचित मात्रा में प्रयोग, तथा (य) समय-समय पर खरपतवार नियंत्रण एवं प्राकृतिक परजीवियों का संरक्षण सम्मिलित हैं | उपयुक्त जल निकास के साथ-साथ पौधों की उपयुक्त संख्या एवं उर्वरकों का उचित मात्रा में प्रयोंग करने से फसल उत्पादन पर कोई प्रतिकूल प्रभाव भी नहीं पड़ता | समन्वित कीट प्रबन्धन अपनाने से उपज पर कोई खास अन्तर नहीं आता, बल्कि उत्पादन लागत काफी कम हो जाती है | लाभकारी लागत: लाभ अनुपात के अतिरिक्त समन्वित कीट प्रबन्धन अपनाने के अन्य अनेक लाभ हैं | विभिन्न सस्य क्रियाओं के साथ समन्वित कीट नियंत्रण कार्यक्रम के अन्तर्गत अरहर में छेदक कीटों के नियंत्रण के लिए परीक्षण किये गये (बढ्या एवं अन्य, १९९0) | उर्वरकों की संतुलित मात्रा, निराई-गुड़ाई एवं पौध संरक्षण की विधियों के साथ-सा थ अपनाने पर सर्वाधिक उपज एवं शुद्व लाभ प्राप्त हुआ | लागत: लाभ का अनुपात निराई- गुड़ाई एवं पौध संरक्षण की विधियों को साथ-साथ अपनाने की तुलना में केवल पौध संरक्षण की विधियों कों अकेले अपनाने से अधिक प्राप्त हुआ | कृषि प्रौद्योगिक पद्वतियों के विभिन्न अध्ययनों से ज्ञात हुआ कि मटर की फसल की अक्टूबर के आखिरी सप्ताह में बुआई, पौधे से पौधे की दूरी एवं पंक्ति से पंक्ति की दूरी क्रमश: ६.द्ध सेमी एवं ३0 सेमी रखने के साथ ही साथ उर्वरकों की संतुलित मात्रा एवं सिंचाई देने पर उपज की सर्वाधिक मात्रा प्राप्त हुई, जबकि पत्ती सुंरगक कीट की संख्या अधिक थी (कुमार एवं अन्य, १९९१) | सस्य क्रियाओं से लाभ एवं हानियाँ
हानियाँ:
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मध्य
मैदानी क्षेत्र
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पश्चिमी मैदानी क्षेत्र
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मध्य-पश्चिम मैदानी क्षेत्र
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दक्षिण-पश्चिम
अर्द्धशुष्क |
भावर एवं तराई क्षेत्र
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बुन्देलखण्ड क्षेत्र
क्षेत्रीय समन्यवयन इकाई, क्षेत्र-४, भ. कृ. अनु. प. कानपुर - २०८००२. |